IPC SECTION 354

“महिला की इज्जत का सम्मान है जरूरी”- IPC SECTION 354

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लिंग आधारित हिंसा का अंत क्यों नहीं हो रहा है, यह सवाल दसकों से चलता आ रहा है | इसका उत्तर है की, क्योंकि हम वास्तव में समस्या को लक्षित नहीं कर रहे हैं। वे कागज पर अच्छे लगते हैं जाहा लिखा जाता है की हम महिलाों की इज्जत के लिए चिंतित है लेकिन वास्तव में यह बेतुका है| अपराधीकरण के दायरे को एक महिला की मर्यादा तक सीमित करके रखा है, वह उसके प्रति अनादर के हर दूसरे कार्य को प्रोत्साहित करता है और समाज को कलंकित करता है। एक महिला की सहमति सिर्फ एक शब्द नहीं उसका अधिकार है | उसके पसंद या न पसंद का दूसरों द्वारा सम्मान होना चाहिए| भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 में इसके बारे में बताया गया है की कोई भी पुरुष किसी महिला की लज्जा का सम्मान नहीं करता है तो उसे 5 साल तक की कारावास हो सकती है |

IPC SECTION 354:

IPC SEC 354- जो कोई किसी महिला की लज्जा और विनम्रता भंग करने के लिए आपराधिक बल का प्रयोग करता है या जानता है कि यदि ऐसा कार्य किया जाता है, तो वह महिला की लज्जा को ठेस पहुंचाएगा, ऐसा कहा जाता है कि उसने अपराध किया है और उसे कम से कम पांच साल के कारावास की सजा दी जाएगी।

यह एक संज्ञेय अपराध है और गैर-जमानती भी।

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सामग्री:

  • हमला एक महिला पर होना चाहिए।
  • उसने उसके खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग किया होगा।
  • एक महिला की शील भंग करने के लिए आपराधिक बल का प्रयोग किया जाना चाहिए।

IPC SEC. 354, महत्वपूर्ण निर्णय:

रूपन देओल बजाज बनाम कंवर पाल सिंह गिल, 1996- याचिकाकर्ता एक आईएएस अधिकारी था जिसे आईजी कार्यालय बुलाया गया था। आरोपित ने शिकायतकर्ता की पीठ थपथपाई। इस तरह के अपराध के लिए आईजी पर धारा 354 के तहत आरोप लगाया गया था।

विनम्रता का क्या अर्थ है IPC SEC 354 के अंतरगत ?

पंजाब राज्य बनाम मेजर सिंह में सर्वोच्च न्यायालय ने इस सवाल पर विचार किया कि शील का क्या अर्थ है, जब यह माना जाता है कि एक विशेष कार्य ने एक महिला की शील भंग कर दी है, और क्या एक शिशु बच्चे की लज्जा को बिल्कुल भी भंग किया जा सकता है। इस मामले में साढ़े सात महीने की बच्ची की योनि में चोट लगना शामिल है। भारत में एक प्रसिद्ध आपराधिक वकील आरोपी के लिए पेश हो रहा है। बहुसंख्यक दृष्टिकोण के अनुसार, एक महिला की लज्जा भंग करने का कार्य पीड़ित की उम्र तक सीमित नहीं था, और क्या पीड़िता उस पर किए जा रहे आक्रामक कृत्य के बारे में जानती थी या जागरूक थी।

बचावत जे. के अनुसार- एक महिला अपनी विनम्रता से ही जानी जाती है। असल बात तो ये है की लड़कियाँ जन्म लेने के बाद से ही घर की इज्ज़त कहलाती है, मतलब उनकी इज्जत से खिलवाड़ घर की इज्जत से खिलवाड़ माना जाता है| और यही चीज़ दोषित मन के आरोपियों को उत्तेजित करती है| अतः आरोपी का दोषी इरादा पूरे मामले की जड़ है। महिला की प्रतिक्रिया बहुत उचित है, लेकिन हमेशा से उचित निर्णय नहीं ले पाती, उदाहरण के तौर पर जब एक दोषी दिमाग वाला आरोपी चुपके से सोई हुई महिला के मांस (शरीर का कोमल भाग) को छूता है| वह महिला इससे अनजान हो सकती हैं, वह बेहोशी की हालत में हो सकती है, वह सो रही हो सकती है, उस की सराहना करने में असमर्थ हो सकती है, इसके परिणाम स्वरुप, अपराधी IPC की धारा 354 के तहत दंडनीय है।

निष्कर्ष:


अंत में, यही परिणाम निकलता है की, लिंग आधारित हिंसा के अनगिनत मामलों ने इस तथ्य को घर में ला दिया है कि एक महिला के खिलाफ अधिकतर अपराधों के पीछे का इरादा उसकी ‘गरिमा’ के तत्व को मिटाना है| जिसे किसी भी तरह से गैर-सहमति से विपरीत रूप से संबंधित माना जाता है। अपराधी उसके शरीर का उपयोग करके उसे तथा उसके परिवार को उत्पीढ़ित करता है| आंशिक रूप से, इससे यही पता चलता है की ऐसी हीन हरकत ‘दोषी मन’ के विचार से उपजा है| ऐसे दुष्ट मन के लोगो का कहना है की महिलाओं के कपड़े उन्हें यौन शोषण का हमला करने के लिए उत्तेजित करता है| अतः यह निर्णय हमे ही लेना है की किन पर हमला करने की आवश्यकता है, महिलाओं के कपड़ों पर या समाज की सोच पर!

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