IPC SECTION 376 | CVN NEWS

महिला के साथ बलात्कार करना एक संगीन जुर्म है! IPC Section 376 में है इस अपराध के लिए प्रावधान!

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किसी भी महिला के साथ बलात्कार करना एक संगीन जुर्म की श्रेणी में आता है| बलात्कार करने पर IPC SECTION 376 के तहत उस आरोपी पर मुकदमा चलाया जायेगा| INDIAN PENAL CODE SECTION 376 की तहत किसी महिला के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाना बलात्कार की श्रेणी में रखा जाता है| अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह भारतीय कानून की नजर में दोषी है और उस पर कार्यवाही और कड़ी सजा का प्रावधान है|

IPC SECTION 376 –

1 कोई भी व्यक्ति उप-धारा (2) के अलावा, किसी भी माहिला के सहमति के बगैर बलात्कार जैसा संगीन अपराध करता है तो उसे IPC SECTION 376 के तहत कम से कम 7 साल की कठोर दण्ड और ज्यादा से ज्यादा आजीवन तक का कारावास का सजा मिल सकता है| साथ ही वह जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा|

2 कोई भी –
i) पुलिस अफसर जो बलात्कार कारीत करता है

– उस थाने में जिसमे उसे नियुक्त किया गया है या किसी अन्य थाने में
– माहिला जो उसके गिरफ्त में होगी या किसी अन्य पुलिस अफसर के गिरफ्त में, या

ii) लोक सेवक जो बलात्कार कारित करता है, लोगो की संरक्षण करने हेतु नियुक्त या उसके अधीनस्थ (subordinate) किसी माहिला का बलात्कार करता है, या

iii) केंद्र या राज्य सरकार द्वारा किसी क्षेत्र में तैनात सशस्त्र बलों (Armed Force) का सदस्य होने के नाते ऐसे क्षेत्र में बलात्कार करता है, या

iv) किसी जेल, रिमांड होम या उस समय लागू किसी कानून या किसी महिला या बच्चों की संस्था के तहत स्थापित हिरासत के अन्य स्थान के प्रबंधन, या कर्मचारियों पर होने के नाते, ऐसी जेल के किसी भी कैदी पर बलात्कार करता है, रिमांड होम , स्थान या संस्था; या

v) किसी अस्पताल के प्रबंधन या स्टाफ पर होने के कारण, उस अस्पताल में एक महिला पर बलात्कार करता है; या

vi) एक रिश्तेदार, अभिभावक या शिक्षक, या महिला के प्रति विश्वास या अधिकार की स्थिति में एक व्यक्ति होने के नाते, ऐसी महिला पर बलात्कार करता है; या

vii) सांप्रदायिक या सांप्रदायिक हिंसा के दौरान बलात्कार करता है; या

viii) यह जानते हुए बलात्कार करना की वह महिला गर्भवती है ; या

ix) सोलह वर्ष से कम उम्र की महिला पर बलात्कार करता है; या

x) सहमति देने में असमर्थ महिला से बलात्कार करता है; या

xi) किसी महिला पर नियंत्रण या प्रभुत्व की स्थिति में होने पर, ऐसी महिला पर बलात्कार करता है; या

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xii) मानसिक या शारीरिक अक्षमता से पीड़ित महिला से बलात्कार करता है; या

xiii) बलात्कार करते समय गंभीर शारीरिक क्षति का कारण बनता है या एक महिला के जीवन को अपंग या विकृत या खतरे में डालता है; या

xiv) एक ही महिला से बार-बार बलात्कार करता है,

तो उस व्यक्ति को कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास होगा, और जुर्माना के लिए भी उत्तरदायी होगा।

IPC SECTION 376 महत्वापूर्ण निर्णय:


क्या पत्नी के साथ सम्भोग बलात्कार कहा जा सकता है?

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशानुसार 15 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ विवाह के बाद सहमति के साथ सम्भोग करने के बाद भी वह बलात्कार माना जाएगा| ऐसे मामलों में पति को किसी भी प्रकार की धार्मिक रियायत नहीं दी जाएगी| तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ए. के. सीकरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ का कहना था कि, ”15 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ संभोग आई. पी. सी. की धारा 376 के तहत एक अपराध है। इस कानून के विषय में कोई अपवाद नहीं हो सकता है और इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।”

क्या शादी का वादा करके महिला के साथ सम्भोग करना बलात्कार कहलाता है ?

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्स बनाम दिल्ली में बताया है की शादी का वादा करके महिला के साथ सम्भोग के सभी मामले बलात्कार नहीं कहलायेगें| अगर कोई व्यक्ति केवल महिला के साथ सम्भोग करने के लिए उससे शादी का झूठा वादा करता है और शादी भी नहीं करता है तब वह बलात्कार कहलायेगा|

अदालत ने इस संबंध पर एक महिला द्वारा दायर याचिका पर चर्चा की, जो 2008-2015 तक एक पुरुष के साथ संबंध में थी, जिसके बाद उसने उसे छोड़ दिया और दूसरी महिला से शादी कर ली।

इसपर न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने कहा है “‘शारीरिक संबंध बनाने के लिए शादी के वादे का लालच देना और पीड़िता द्वारा इस तरह के लालच का शिकार होना,एक पल के संदर्भ में समझा जा सकता है।”

कोर्ट ने यह भी कहा, ”यह स्वीकार करना मुश्किल है कि एक ऐसा आपसी संबंध, जिसमें समय की इतनी ज्यादा अवधि में यौन गतिविधि भी शामिल थी, वो इच्छिक और स्नेह के कारण नहीं बल्कि केवल शादी के लालच के आधार पर जारी रखा गया था।” अंत में, यह देखते हुए कि ”वर्तमान अपील भी छह सौ चालीस दिनों की एक असाधारण देरी के बाद दायर की गई है”, अदालत ने कहा कि अपील में कोई मैरिट नहीं हैं और इस प्रकार, इस अपील को मैरिट के साथ-साथ देरी के आधार पर खारिज कर दिया गया।

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– Snehil Narayan

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